भैया जी के पति वशीकरण मंत्र


ladki patane ka mantra

पत्नी अपने पति के प्रति पूरी वफादारी से पत्नी धर्म का पालन कर रही हो किन्तु पति अपनी पत्नी को धोखा दे रहा हो | पत्नी के प्रति वफादार ना हो | या जब भी किसी स्त्री का पति उसके अनुकूल व्यवहार ना करता हो पत्नी की क़द्र ना करता हो और पराई स्त्रियों से सम्बन्ध रखता हो तो पत्नी को अपने पति को सही रास्ते पर लाने के लिए पत्नी को इस मंत्र का इकतालीस दिनों तक प्रतिदिन इक्कीस बार जाप करना चाहिए | मंत्र के सिद्ध हो जाने पर स्त्री जब भी कोई कपड़ा पहने तो इसी मंत्र को इक्कीस बार पढ़कर कपडे पर फूंक मार के वही कपड़ा पहन कर पति के सामने जाए तो पति की नज़र स्त्री पर पड़ते ही पति पूरी तरह से पत्नी के वश में हो जाएगा | पति अपनी पत्नी के अतिरिक्त कभी भी किसी पराई महिला के तरफ आकर्षित नहीं होगा | इस उपाय से पति की सभी गन्दी आदते छुट जायेंगी |

मंत्र :

सुन सिय सत्य आशीष हमारी |

पूजह मन कामना तुम्हारी ||

 

पति पत्नी वशीकरण मंत्र

यह एक उपयोगी मंत्र है इस मंत्र की सिद्धि से पति पत्नी के बीच मतभेद दूर होकर आपस में प्रेम बढ़ता है | और दोनों का जीवन आनदमय हो जाता है | मंत्र का जाप करते समय अपने जीवन साथी का वस्त्र अपने आसन के नीचे अवश्य  रख लेना चाहिए | पति करे तो पत्नी का और पति करे तो पत्नी का |

व्याहता स्त्री का वशीकरण

शादी शुदा स्त्री हो या कुवारी सभी तरह की महिलाओं पर यह मंत्र काम करता है | स्त्री वशीकरण के इस मंत्र को पहले सवा लाख बार जाप करके सिद्ध कर लेना चाहिए | मंत्र के जाप करने का शुभ समय प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में ज्यादा अच्छा माना गया है | मंत्र को सिद्ध हो जाने के पश्चात जब भी इस मंत्र का प्रयोग करना हो तो कोई भी फूल या अनार की लकड़ी या तुलसी की लकड़ी या पत्ते पर इक्क्यावन बार इस मंत्र  का जाप करके और फूंक मारके जिस भी स्त्री को स्पर्श करा देंगे वह आपके वश में हो जायेगी |

मंत्र : .

  • सर्व मंगल मांगले शिव स्वार्थ साधिके |

     शरनाये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते |

  • तमिश्वराम ग्यान्मंताश्च परमं महेश्वरम ताम देवतानाम परमं च देवतं |

पतिम पतिनाम परमं परिस्ता – दिदाम देवं भुनेश्रीम ||

 

  • शरणागत – दीनार्त परित्राण परायण |

सर्वास्य्तिहरे देवी नारायणी नमोस्तुते ||

  • विश्वेश्री जगाद्यात्रीम स्थित संहार कारिनिम |

निद्राम भगवती विश्नोर्तुलाम तेजस प्रभोह ||

  • सर्वाबाधा बिनिर्मुक्तो धन धान्य सुताम्ब्रितः |

मनुष्यों मति प्रासादीन भविष्यति ना संशयः ||

  • ॐ नमो आदेश गुरु को वन में बयाई |

अनजानी जिन जाए हनुमंत |

गुरु की भक्ति मेरी मेरी शक्ति |

फुरो मंत्र ईश्वरा बाचा ||

  • ॐ नमो कुटकी ज्वाल मुखी काली |

तू नमो चामुंडा रोग पीड़ा दूर कर |

सात समुद्र पार कर आदेश कामरूप देश |

कामाख्या माई हादिद सी चिंदी की दुहाई ||

  • ॐ नमो काली कन्कालिनी नदी पार बसे |

इस्माइल जोगी लोहे का काटा काटी काटी

लोहे का गोला काट काट तो शब्द साँचा

फुरो मंत्र इश्वरो बाचा ||

  • लंका में बैठ के माथ हिलाए हनुमंत |

सो देखि राक्षस गणपरे दुरंत |

बैठी सीता देवी अशोक वन में |

देखि हनुमान को आनंद भई मन में |

सीता देवी ( अमुकं ) वशं करू करू |

आदेश कामाख्या राम की दुहाई ||

 

१० – जय माँ विन्ध्य वासिनी देवी |

जल में थल में वास तुम्हारा |

“ अमुक ‘ नाम की नारी को वश में ना करे तो |

सात देवियों की दुहाई ||

लाख कोशिशो के बाद भी घर में अशांति बनी रहे पति पत्नी के सम्बन्ध बिगड़ते जाय तो गाय के एक छोटे से उपले का दीपक बनाकर उसमे तिलका तेल और थोड़ा सा पुराना गुड डालकर दीपक को जलाकर घर के मुख्य दरवाज़े के बीच में रख देना चाहिए | इससे घर में शान्ति बनी रहती है |


पति को अपने वश में करने का मंत्र




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वशीकरण